गीतिका

*गणपति वंदना*
नित वंदना गजराज की , तुम आदिदेव विशेष हो।
मन आस द्वार लगा झुके, वह नाम एक गणेश हो।।
प्रभु भोर वंदन आरती, मति मूढ़ मंद सुजान हो।
पकवान मोदक भोग का, अवनीश देव नरेश हो।।
मन रोग से भयभीत हो,कर जाप मंत्र विधान हो।
सुचि ज्ञान दान प्रसाद दो, वरदान नाथ दिनेश हो।।
नित एकदंत अराधना,प्रथमाधि नाम जपो मिनी।
अवदान है प्रभु साधना ,तुम दीन बंधु महेश हो।।
रत पाप पुण्य क्रिया करें,बस एक ही अवधारणा।
रमता रहे मन राम में, बस अंत काल सुवेश हो।।


✍️ डॉ सीमा अवस्थी "मिनी"
      ३६गढ़, भाटापारा

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"नारी सम्मान पर अभिव्यक्ति"

*जन्माष्टमी*कान्हा कब तुम आओगे ?दरस को प्यासी तरसे अखियाँ,कब आकर दरस दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ? अब धेनु नहीं कानन जाती,अब कहांँ माखन मिश्री दूध मलाई ?मुरली का जादू भी खो रहा,क्या मुरली अधर लगाओगे? कान्हा कब तुम आओगे ? हर कदम पर दुशासन दुर्योधन ,राह में शीश उठाते हैं।चीर हरण करने को आतुर,एक पल भी न घबराते हैं । शिशुपाल का वध करने को, क्या सुदर्शन चक्र चलाओगे?कान्हा कब तुम आओगे? घर घर हैं धृतराष्ट्र गांधारी,पुत्र प्रेम या सत्ता सुख हो,अनाचार की चलती आरी , क्या दंभी को सद्गमार्ग दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ?समाज हो रहा पथ भ्रमित, मानवता पर प्रपंची घेरा,गीता का ज्ञान सुनाकर,क्या कर्तव्य पथ समझाओगे?कान्हा अब तुम आओगे?अजब बात थी त्रेता द्वापर ,अब कलयुग के चंगुल का फेराकलयुग का त्रास मिटानेक्या कल्कि रूप में आओगे?कान्हा कब तुम आओगे?दरस को प्यासी तरसे अखियाँकब आ के दरस दिखाओगे?कान्हा तुम कब आओगे?✍️ डॉ सीमा अवस्थी 'मिनी' भाटापारा छत्तीसगढ़।*श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं और बधाई*....🙏