सवैया छंद
🙏 *गणेश जी को समर्पित*🙏 *महाभुजंगप्रयात सवैया* (२४ वर्ण ८ यगण १२२×८) १- निराकार एका दया कर पुकारें, नहीं साथ कोई सदा हो हमारे। महाकाय देवा विराजो सदा को, करूँ वंदना आरती मैं सकारे।। खड़ी द्वार तेरे बनी मैं भिखारी, सवैया लिखें आज साथी हमारे।। करें कामना हो सहारा विधाता, दया साथ होगी लगेंगे किनारे।। २- मनोकामना से दयावान ध्याएँ, हरी दूब सिंदूर केला चढ़ाएँ। करें वंदना नाम लेके उचारें, विधाता सहारा बड़ी आस लाए। पड़े पाँव तेरे तुम्हीं हो सहारा, कभी तो सुनोगे मना के रिझाए। विधाता लिखी लेखनी को सुधारें, निराकार का जाप जो भी कराए।। सीमा अवस्थी, भाटापारा,