*जन्माष्टमी*कान्हा कब तुम आओगे ?दरस को प्यासी तरसे अखियाँ,कब आकर दरस दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ? अब धेनु नहीं कानन जाती,अब कहांँ माखन मिश्री दूध मलाई ?मुरली का जादू भी खो रहा,क्या मुरली अधर लगाओगे? कान्हा कब तुम आओगे ? हर कदम पर दुशासन दुर्योधन ,राह में शीश उठाते हैं।चीर हरण करने को आतुर,एक पल भी न घबराते हैं । शिशुपाल का वध करने को, क्या सुदर्शन चक्र चलाओगे?कान्हा कब तुम आओगे? घर घर हैं धृतराष्ट्र गांधारी,पुत्र प्रेम या सत्ता सुख हो,अनाचार की चलती आरी , क्या दंभी को सद्गमार्ग दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ?समाज हो रहा पथ भ्रमित, मानवता पर प्रपंची घेरा,गीता का ज्ञान सुनाकर,क्या कर्तव्य पथ समझाओगे?कान्हा अब तुम आओगे?अजब बात थी त्रेता द्वापर ,अब कलयुग के चंगुल का फेराकलयुग का त्रास मिटानेक्या कल्कि रूप में आओगे?कान्हा कब तुम आओगे?दरस को प्यासी तरसे अखियाँकब आ के दरस दिखाओगे?कान्हा तुम कब आओगे?✍️ डॉ सीमा अवस्थी 'मिनी' भाटापारा छत्तीसगढ़।*श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं और बधाई*....🙏

जन्मेजय (विष्णु)
बड़े बड़े विषधर आए हैं,
अपना फन फैलाने को,
फन दिखाने लगी प्रदर्शिनी,
लगा सपेरा लुभाने को,
शुरू हुआ जब नाग नृत्य तब,
जन्मेजय ने बाजी मारी,
हवनकुंड में जा बैठा वो,
दोनों एक दूजे पर भारी,।
पड़ला देखो किसका होगा तय,
पर जन्मेजय का पड़ला भारी।
सबने मिलकर किया आह्वान,
जन्मेजय का बलिदान करो,
अपना वंश बचाने को,
किसी का बलिदान करो।
एक एक कर वार करें जब,
स्वधा समाहित सभी हुए,
जन्मेजय की आग में जलाकर,
स्वयं हवन कुंड में भस्म हुए।
स्वयं हवन कुंड में भस्म हुए।


इस रचना का चुनावी राजनीतिक परिदृश्य से कोई संबंध नहीं

✍️ सीमा अवस्थी 

Popular posts from this blog

"नारी सम्मान पर अभिव्यक्ति"

गीतिका