मुक्तक
१-
सतह पर तैरने से गहराईयाँ नहीं मिलती,बरसाता हो जब पाला तो कलियांँ नहीं खिलती,
डूबना पड़ता है मंजिल की तलाश में,
यही वो सफर है जहां तन्हाईयाँ नहीं मिलती।
२-
आज एक नई शुरुआत कर लूँ,
अपने आप से मुलाकात कर लूँ,
कुछ ख्वाब जिंदगी के अधूरे रह गये हैं,
क्यों न उन्हें पूरा करने का प्रयास कर लूँ।
३-
गीली लकड़ी सा इश्क तुमने सुलगाया है।
न जल पाया है न बुझ पाया है ।
आईने में खुद को ही निहार लेते हैं ।
ये सोचकर कि तू मुझमें ही समाया है।