"होली की शुभकामनाएंँ....."

देता सुनाई फाग,रंगने होली आई।
नभ लालिमा बिछा,कली टेसू खिल आई।
रंग दो सबकी प्रीत, खिल उठे मन का अंँगना।
बदले रंग हजार, आज इंसान दिखता ,
चलता गहरी चाल, लालिमा देती दिखाई।।

फागुन की चल रही बयार,
देखो होली आई है।
श्वेत श्याम रंग नभ की आभा,
टेसू ने कर दिया लाल,
देखो होली आई है।
नील वर्ण के कृष्ण कन्हाई,
राधिका फूल गुलाब,
देखो होली आई है।
मस्त मलंग ग्वाल सब घूमें,
फागुन का उड़ता गुलाल,
देखो होली आई है।
बरजोरी करें कुँवर कन्हाई,
झूम झूम खेल रहे फाग,
देखो होली आई है।
हुरियारों की टोली झूमें,
मल रहे गुलाबी रंग डाल ,
आई होली आई है।
बरसाने की सखी सहेली,
निकली राधा रानी टोली,
मिल गये उन्हें नन्दलाल,
बोले होली आई है।
प्रीत रंग चढ़ा है कान्हा,
अपने रंग रंग लो गोपाल,
देखो होली आई है।
नीला पीला हरा गुलाबी,
फूट रही सतरंगी धार,
देखो होली आई है।
रंगी श्याम रंग प्रीत चुनरिया,
प्रेम भक्ति चुनर लाल,
देखो होली आई है।
आसमान सिन्दूरी आभा,
कोयली भी छेड़ रही तान,
देखो होली आई है।
सारा जग रंगों का मेला,
फागुन में बरसे गुलाल ,
देखो होली आई है।
फूट रही प्रीत रसधार,
देखो होली आई है।


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"नारी सम्मान पर अभिव्यक्ति"

*जन्माष्टमी*कान्हा कब तुम आओगे ?दरस को प्यासी तरसे अखियाँ,कब आकर दरस दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ? अब धेनु नहीं कानन जाती,अब कहांँ माखन मिश्री दूध मलाई ?मुरली का जादू भी खो रहा,क्या मुरली अधर लगाओगे? कान्हा कब तुम आओगे ? हर कदम पर दुशासन दुर्योधन ,राह में शीश उठाते हैं।चीर हरण करने को आतुर,एक पल भी न घबराते हैं । शिशुपाल का वध करने को, क्या सुदर्शन चक्र चलाओगे?कान्हा कब तुम आओगे? घर घर हैं धृतराष्ट्र गांधारी,पुत्र प्रेम या सत्ता सुख हो,अनाचार की चलती आरी , क्या दंभी को सद्गमार्ग दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ?समाज हो रहा पथ भ्रमित, मानवता पर प्रपंची घेरा,गीता का ज्ञान सुनाकर,क्या कर्तव्य पथ समझाओगे?कान्हा अब तुम आओगे?अजब बात थी त्रेता द्वापर ,अब कलयुग के चंगुल का फेराकलयुग का त्रास मिटानेक्या कल्कि रूप में आओगे?कान्हा कब तुम आओगे?दरस को प्यासी तरसे अखियाँकब आ के दरस दिखाओगे?कान्हा तुम कब आओगे?✍️ डॉ सीमा अवस्थी 'मिनी' भाटापारा छत्तीसगढ़।*श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं और बधाई*....🙏

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