*विश्व कविता दिवस पर..*

*कविता दिवस क्या है....?*

मन की कोरी कल्पना में,
भर उठे हुँकार कविता।
मन में उठती नव तरंगें,
गढ़े मसीपथ ये ध्रुविता। 
भाव की माला पिरोकर,
शब्दों से श्रृंगार करती।
छंद रस लय व्यंजना से,
कथ्य में वह प्राण भरती।
लेखनी भर भाव चलती,
बन पड़े कविता सुघड़।
हो कहीं जब सृजन बाधित,
लय भी जाती है उजड़।
निस्तेज हो जब भावना,
मसि मेरी सब रंग लिखती।
उमड़ घुमड़ कर मेघ जैसे,
नित नए सोपान गढ़ती। 
क्षुब्ध मन अवसाद घेरे,
फूट पड़ते बोल हैं।
प्रेम की कोपल निकलती,
मंद मंद किलोल है।
एक कलिका काव्य की, 
जब खिल उठे तो बोल कविता।


✍️ स्वरचित एवं मौलिक,
     डॉ सीमा अवस्थी ,
   भाटापारा,छत्तीसगढ़।

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"नारी सम्मान पर अभिव्यक्ति"

*जन्माष्टमी*कान्हा कब तुम आओगे ?दरस को प्यासी तरसे अखियाँ,कब आकर दरस दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ? अब धेनु नहीं कानन जाती,अब कहांँ माखन मिश्री दूध मलाई ?मुरली का जादू भी खो रहा,क्या मुरली अधर लगाओगे? कान्हा कब तुम आओगे ? हर कदम पर दुशासन दुर्योधन ,राह में शीश उठाते हैं।चीर हरण करने को आतुर,एक पल भी न घबराते हैं । शिशुपाल का वध करने को, क्या सुदर्शन चक्र चलाओगे?कान्हा कब तुम आओगे? घर घर हैं धृतराष्ट्र गांधारी,पुत्र प्रेम या सत्ता सुख हो,अनाचार की चलती आरी , क्या दंभी को सद्गमार्ग दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ?समाज हो रहा पथ भ्रमित, मानवता पर प्रपंची घेरा,गीता का ज्ञान सुनाकर,क्या कर्तव्य पथ समझाओगे?कान्हा अब तुम आओगे?अजब बात थी त्रेता द्वापर ,अब कलयुग के चंगुल का फेराकलयुग का त्रास मिटानेक्या कल्कि रूप में आओगे?कान्हा कब तुम आओगे?दरस को प्यासी तरसे अखियाँकब आ के दरस दिखाओगे?कान्हा तुम कब आओगे?✍️ डॉ सीमा अवस्थी 'मिनी' भाटापारा छत्तीसगढ़।*श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं और बधाई*....🙏

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