*काशी विश्वनाथ*
सुप्रभात 🙏🙏
*काशी*
कैसा श्रृंगार भव्य हुआ है,
शिव की नगरी काशी में।
भेष बदलकर घूम रहे हैं,
मानो देवता काशी में,
सारे जहांँ से स्वर्ग उतरकर,
दरबार सजाया काशी में।
माँ गंगा का उजला आँचल,
साँझ सुनहरी काशी में।
घाट- घाट की महिमा न्यारी,
विविध कलाएँ काशी में।
संस्कार और ज्ञानस्थली,
आदिकाल से काशी में।
जीवन का कण कण चाहे,
सदा निरंजन काशी में।
जड़ चेतन मन अवचेतन हो,
रमना चाहे काशी में।
शिव की महिमा सदा बरसती,
अद्भुत बस्ती काशी में।
काया पलट हुआ है संभव,
शिव की नगरी काशी में।
✍️ सीमा अवस्थी
भाटापारा, छत्तीसगढ़।
(१९-०३-२०२३)