"आजादी का स्वर्ण महोत्सव"
*आजादी का स्वर्ण महोत्सव*
आजादी का स्वर्ण महोत्सव भारतवर्ष मनाएगा।
खड़ा हिमालय प्रहरी बनकर तीन रंग मुस्काएगा।
उठो देश के वीर सपूतों मातृभूमि का मान करो।
कायर रिपु को धूल चटाकर अभिनन्दन अभिमान भरो।
त्याग और बलिदान अमर हो,स्मृतियों का गान करो।
मातृभूमि का उज्जवल आँचल ऐसे सीना तान चलो।
उठो देश के वीर सपूतों मातृभूमि का मान करो।
गाँव शहर हर गली मोहल्ले ,परचम ये लहराएगा।
गगन चूमती आकांक्षा के नत, तिरंगा शान दिखाएगा।
सरसिज में खिल खड़ा कमल दल,गौरव गान सुनाएगा।
पथ विकास की सीमा रेखा लहर फहर इठलाएगा।
उठो देश के वीर सपूतों मातृभूमि का मान करो,...
भेदभाव की खाई भरकर नया सबेरा लाया है।
देश प्रेम का लिए संदेशा अंतरिक्ष पहुँचाया है।
बाल्यकाल की परिधि लाँघकर ,देश पिचहत्तर पार हुआ।
निर्धन अरु लाचारों का हो घर, ऐसा सपना साकार हुआ।
भ्रष्टतंत्र और मक्कारों ने जमकर मुँह की खाई है।
बरसों से लिपटी थी अस्मत उठकर धूल झड़ाई है।
वंदे मातरम् भाव पताका विश्व धरा बलखाई है।
विश्व विजेता भारत बनकर अपनी शाख बनाई है।
आजादी का पर्व महोत्सव चूम गगन लहराएगा।
तीन रंग का गान बसाकर ,स्वर नभ में ठहर जाएगा।
शांति का प्रतीक तिरंगा अवनी अंबर रंग जाएगा। आजादी का स्वर्ण महोत्सव भारत वर्ष मनाएगा।
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✍️ डॉ सीमा अवस्थी
भाटापारा छत्तीसगढ़।
(१४-०८-२०२२)