यशोधरा


गौतम तुम तो *बुद्ध* हो गये,
मैनें क्या पाया बतलाओ।
 विरह-दग्ध मैं यशोधरा हूँ,
मन राहुल का बहलाओ। 
शिशु को छोड़ गये नींद में, 
मुझको भी नहीं जगाया।
उस मन की क्या समझोगे?
जिस मन ने धोखा खाया।
तुम *मध्यम-मार्ग* बताते,
संवाद सहज कर जाते थे। 
तुम पीड़ा जग की हरने,
 मेरी पीड़ा हर न पाए?
संसार सुखी रखने को,
क्या छल ही एक सहारा,
मन झंझानिल में अडिग  
मैंने एकाकी जीवन वारा।
तुम हृदय शून्य हुए ,यह क्या? 
शिशु अबोध समझ पाएगा।
तुम प्राप्त करो प्रबोधन,
पितृ स्नेह नहीं दे पाए।
तुम बुद्ध बने मैं शुद्ध रही,
मन पीड़ा मैंने खूब सही।
निर्वाण दिलाने युग को,
गृहस्थी मेरी बली चढ़ी।
अब मेरा जीवन युद्ध हुआ,
मैं अब गांडीव सम्हालूँगी,
उर अंतर में भरी वेदना,
अंतर्नाद एकांत सही,
 रिक्त व्यथा जीवन की, 
मौन तत्व की कौन कहीं।।

✍️ स्वरचित और मौलिक
      सीमा अवस्थी

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"नारी सम्मान पर अभिव्यक्ति"

*जन्माष्टमी*कान्हा कब तुम आओगे ?दरस को प्यासी तरसे अखियाँ,कब आकर दरस दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ? अब धेनु नहीं कानन जाती,अब कहांँ माखन मिश्री दूध मलाई ?मुरली का जादू भी खो रहा,क्या मुरली अधर लगाओगे? कान्हा कब तुम आओगे ? हर कदम पर दुशासन दुर्योधन ,राह में शीश उठाते हैं।चीर हरण करने को आतुर,एक पल भी न घबराते हैं । शिशुपाल का वध करने को, क्या सुदर्शन चक्र चलाओगे?कान्हा कब तुम आओगे? घर घर हैं धृतराष्ट्र गांधारी,पुत्र प्रेम या सत्ता सुख हो,अनाचार की चलती आरी , क्या दंभी को सद्गमार्ग दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ?समाज हो रहा पथ भ्रमित, मानवता पर प्रपंची घेरा,गीता का ज्ञान सुनाकर,क्या कर्तव्य पथ समझाओगे?कान्हा अब तुम आओगे?अजब बात थी त्रेता द्वापर ,अब कलयुग के चंगुल का फेराकलयुग का त्रास मिटानेक्या कल्कि रूप में आओगे?कान्हा कब तुम आओगे?दरस को प्यासी तरसे अखियाँकब आ के दरस दिखाओगे?कान्हा तुम कब आओगे?✍️ डॉ सीमा अवस्थी 'मिनी' भाटापारा छत्तीसगढ़।*श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं और बधाई*....🙏

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