*संघर्ष*
संघर्ष का हर्ष उत्कर्ष पहुँचाता है।
जीवन का अमर्ष अपकर्ष दिलाता है।
संघर्ष जीवन विजय रण है
सुखद अनुभूति का क्षण है।
इसकी अपनी ही धुन है।
क्या खोना क्या पाना भ्रम है।
जो रण में आगे निकल लोहा मनवाता है।
उसने सफलतम जीवन का परचम लहराया है।
संघर्ष में जीवन निखरता या बिखरता है।
संघर्ष में निखरने को,
धीरे धीरे पथ चलो,
धीर से सागर पार।
कहीं मिले जीत किसी को,
कहीं मिले हार।
चले संघर्ष की जब चक्की,
पीसे आटा पाट।
मेहनत साहस साथ ले,
पत्थर लेता काट।
✍️डॉ.सीमा अवस्थी
भाटापारा।