सबकी अपनी राम कहानी
*सबकी अपनी राम कहानी*,
दुनिया के मेले में किस्से तो कई हजार।
कोई छुपाए दर्द,बाँटता फिरता कोई प्यार।
जीना यहाँ बहुत कठिन है करते सब व्यापार।
सबकी अपनी राम कहानी जीने का आधार।।
कोई किसी के सुख में सुखी है, गढ़ता है परिवार।
कोई किसी से बात बात में कर बैठे तकरार।
बड़े अजब किस्मत के फन्दे न छूटे घर-बार।
अपनी राम कहानी के साझे में रचा बसा संसार।।
दुःख सुख जीवन के पहलू हैं, बाकी सब बेकार।
जैसा कर्म करोगे वैसा फल है जीवन सार।
अलग अलग मौसम करते हैं, जग में दिन और रात।
सबकी अपनी राम कहानी, जीवन की सौगात।।
✍️ स्वरचित ©®
डॉ सीमा अवस्थी,
भाटापारा,३६गढ़।
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