गीत , "मुलाकात के लिए"
याद में तेरी हम कशीदे गढ़ने लगे,
तार यादों के बुन हम सँवरने लगे।
तुम कब आओगे मुलाकात के लिए,
मैंने चाँद रोक रखा है उस रात के लिए।
हो नहीं पाई जो मिलकर तुमसे बात,
उस अधूरी बात के लिए..
बरसों तरस गई जो आँखें,
अश्कों की होती बरसात के लिए।
कब आओगे बस इतना बता दो,
मन में उठते हर सवालात के लिए।
कब तक रोके रखना है चन्दा,
जगमगा उठे दीप से मन के हालात के लिए।
झूम उठा है मन खुशियों में भर,
रैन मिलन की जज़्बात के लिए।
कब आओगे तुम मुलाकात के लिए....
✍️ डॉ सीमा अवस्थी *मिनी*
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भाटापारा