गीत , "मुलाकात के लिए"

याद में तेरी हम कशीदे गढ़ने लगे,
तार यादों के बुन हम सँवरने लगे।
तुम कब आओगे मुलाकात के लिए,
मैंने चाँद रोक रखा है उस रात के लिए।
हो नहीं पाई जो मिलकर तुमसे बात,
उस अधूरी बात के लिए..
बरसों तरस गई जो आँखें,
अश्कों की होती बरसात के लिए।
कब आओगे बस इतना बता दो,
मन में उठते हर सवालात के लिए।
कब तक रोके रखना है चन्दा,
जगमगा उठे दीप से मन के हालात के लिए।
झूम उठा है मन खुशियों में भर,
रैन मिलन की जज़्बात के लिए।
कब आओगे तुम मुलाकात के लिए....
 ✍️ डॉ सीमा अवस्थी *मिनी*
©®
      भाटापारा 

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"नारी सम्मान पर अभिव्यक्ति"

*जन्माष्टमी*कान्हा कब तुम आओगे ?दरस को प्यासी तरसे अखियाँ,कब आकर दरस दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ? अब धेनु नहीं कानन जाती,अब कहांँ माखन मिश्री दूध मलाई ?मुरली का जादू भी खो रहा,क्या मुरली अधर लगाओगे? कान्हा कब तुम आओगे ? हर कदम पर दुशासन दुर्योधन ,राह में शीश उठाते हैं।चीर हरण करने को आतुर,एक पल भी न घबराते हैं । शिशुपाल का वध करने को, क्या सुदर्शन चक्र चलाओगे?कान्हा कब तुम आओगे? घर घर हैं धृतराष्ट्र गांधारी,पुत्र प्रेम या सत्ता सुख हो,अनाचार की चलती आरी , क्या दंभी को सद्गमार्ग दिखाओगे?कान्हा कब तुम आओगे ?समाज हो रहा पथ भ्रमित, मानवता पर प्रपंची घेरा,गीता का ज्ञान सुनाकर,क्या कर्तव्य पथ समझाओगे?कान्हा अब तुम आओगे?अजब बात थी त्रेता द्वापर ,अब कलयुग के चंगुल का फेराकलयुग का त्रास मिटानेक्या कल्कि रूप में आओगे?कान्हा कब तुम आओगे?दरस को प्यासी तरसे अखियाँकब आ के दरस दिखाओगे?कान्हा तुम कब आओगे?✍️ डॉ सीमा अवस्थी 'मिनी' भाटापारा छत्तीसगढ़।*श्री कृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं और बधाई*....🙏

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